छठ पूजा क्या है, उसका महत्व, पूजा विधि, और नियम

Themicroskills

छठ पूजा


छठ पूजा क्या है?

छठ पूजा मूल रूप से सूर्य देव की उपासना और छठ मैया की आराधना का पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन आजकल पूरे देश में इसकी धूम है।

सूर्य देव हमारे जीवन का आधार हैं और छठ पर्व में उन्हीं की उपासना की जाती है ताकि परिवार, संतान और समाज में सुख‐समृद्धि बनी रहे ।

क्या आप इस दिवाली ये बिज़नेस कर सकते है>> Diwali Business Idea:

छठ पूजा

छठ पूजा का महत्व

छठ पर्व एक महापर्व है, जिसका पौराणिक महत्व बहुत बड़ा है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से छठ मैया संतान की रक्षा करती हैं, उन्हें स्वस्थ्य और दीर्घायु प्रदान करती हैं। मान्यता है कि छठ व्रत रखने से संतान सुख मिलता है और जीवन की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं ।

छठ माता और उनकी कथा

धार्मिक कथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी को संतान सुख नहीं था। ऋषि की सलाह पर राजा ने पुत्र यज्ञ किया, लेकिन उनका बच्चा मृत पैदा हुआ। तभी छठ माता प्रकट हुईं, उन्होंने बच्चे को छुआ और वह जीवित हो उठा। तभी से छठ पर्व मनाया जाने लगा और छठ मैया को संतानों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है

छठ पूजा के चार दिन

यह पर्व चार दिनों तक चलता है—

पहला दिन: नहाए‐खाए

व्रती स्नान करके शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं, जिसमें चने की दाल, चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ली जाती है ।

दूसरा दिन: खरना

इस दिन व्रति पूरा दिन निर्जला व्रत रखते हैं और संध्या समय दूध और गुड़ की खीर, रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं ।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

व्रति कई तरह के फल, लड्डू आदि प्रसाद लेकर बहती नदी या तालाब के किनारे जाते हैं और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं ।

चौथा दिन: सुबह का अर्घ्य

व्रति फिर से जलाशय के किनारे जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, अपनी मनोकामनाएँ रखते हैं और प्रसाद वितरण के बाद व्रत संपन्न करते हैं ।

छठ पूजा कब और कैसे मनाया जाता है?

छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है—एक चैत्र माह में और दूसरी कार्तिक माह में। चैत्र शुक्ल पक्ष की छठ ‘चेती छठ’ कहलाती है, और कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठ ‘कार्तिकी छठ’। इसका शुभ मुहूर्त व्रत रखने की परंपरा के अनुसार तय किया जाता है ।

छठ पूजा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

महाभारत काल से इस पूजा का महत्व रहा है। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य देव की उपासना की थी। मान्यता है कि माता अदिति ने भी छठ मैया की आराधना कर अपने पुत्र को सर्वगुण संपन्न बनाया। छठी मैया को सूर्य देव की बहन भी माना जाता है ।

निष्कर्ष

तो दोस्तों, छठ पर्व केवल एक पूजा नहीं, भारतवर्ष की संस्कृति, आस्था और प्रकृति से जुड़ी साधना है। इसमें मूर्ति पूजा नहीं होती—केवल सूर्य देव और छठ मैया की उपासना होती है। महिलाएँ‐पुरुष दोनों इस पर्व को मनाते हैं, परिवार और समाज की खुशहाली और मनोकामना की पूर्ति के लिए चार दिनों तक कठिन व्रत रखते हैं|

Share On :

Facebook
WhatsApp
LinkedIn

Related Post

Scroll to Top